रविवार, 28 जून 2009

कपिल जी शिक्षा सुधार के लिए राज्यों को धन भी तो दो

एक कांग्रेसी
ओये झाल्लेया देखा हसाडे एच .आर.डी.मिस्टर ब्लैक कोट जनाब कपिल सिबल ने कमाल कर दिया शिक्षा के चिराग को घिस कर सुधारों का जिन् निकाल दियाअब तो फ़ेल होने का डर नही रहेगा सारे विषय पड़े जायेंगेएक प्रदेश से दूसरे प्रदेश में ट्रांसफर होने पर सिलेबस का रगडा नही होगा
कबीर जी ने भी कहा हे कि पोथी पड़ पड़ जग मुआ गया न मन का फेर इसीलिए अब किताबी कीडा बन्ने के बजाये ढाई आखर प्रेम से पड़े जायेंगे
झल्ला
भोले बादशाहों आप भी ना वोही ही होशिक्षा के मुद्दे को छेड़ कर आपके कपिल जी सिंपल अभिमन्यू बन कर चक्रव्यूह में फस गए हेबी.जे.पी.,वाम पंथी ,अर्थार्त सभी दाए बाए अपने विरोध रूपी हथियार तेज करने लग गए हेये लोग तो चुनावों के बाद से ही पानी पी कर आप लोगो को मन ही मन कोस रहे थे अब इन्हे भडास निकालने का मौका मिल गया हेएक असफल शिक्षाविद् ,पार्टी अध्यक्ष ,मुरली मनोहर जोशी ने भी बरसों से ठंडे पड़े काल्डरन के नीचे आग सुल्गानी शुरू कर दी हेये मत सोचना की गुज्जू मोदी भाई ने तो स्वीकार कर लिया हे चतुर मोदी ने मधुर वचनों में यह शर्त भी रख दी हे कि शेष भारत इसे स्वीकार करेगा तभी वो भी इसे गुजरात में लागू करेंगेअनेकता में एकता का दावा करने वाले हमारे देश में भाषा और शिक्षा में कितनी एकता हे ये तो आप को मालूम ही हे यानि ना ९ मन तेल होगा और ना ही राधा नाचेगीझाल्लेविचारानुसार शिक्षा की एक रूपता के लिए राज्यों में केन्द्र से धन भेजने का आश्वाशन दे डालो कुछ ठंडक तो पड़ेगी ही

2 टिप्‍पणियां:

  1. सिब्बल जी ने बिना होम वर्क के ही यह शिगूफा छोड़ दिया था.

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  2. शिक्षा को लेकर हमारा समाज क्या चाहता है अगर इस पर सोचा जाए तो शायद ही कोई सरकार या नेता उसे कर पाऐ क्योकि निचली जाती में अभी भी शिक्षा कमज़ोर धागो से टिकी हुई है जिस दिन हमारी सरकार उसके लिऐ कुछ पक्के कदम उठाएगी तब में समझुंगा कि हा कबिल सिब्बल या कोई भी नेता शिक्षा को समझ पाया है कि शिक्षा का क्या महत्व है हम सबके लिऐ।

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